
आंध्र प्रदेश के Kakinada district में एक पटाखा बनाने वाली यूनिट में लगी आग ने 18 जिंदगियां निगल लीं। सामरलकोटा मंडल के वेतलापालम इलाके में स्थित ‘सूर्या फायर वर्क्स’ में अचानक हुए धमाके के बाद आग तेजी से फैल गई।
जिला कलेक्टर सागिरी शान मोहन ने पुष्टि की कि मलबे से शव निकाले जा रहे हैं और कई लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। अस्पतालों में भर्ती घायलों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
सुरक्षा या सिर्फ कागज़ी इंतज़ाम?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सवाल अब यह है कि क्या फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था?
स्थानीय पुलिस जांच कर रही है कि यूनिट के पास वैध लाइसेंस था या नहीं। हर औद्योगिक हादसे के बाद यही पंक्ति दोहराई जाती है “जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”
पर क्या आदेश हादसों को रोकते हैं, या सिर्फ फाइलों को मोटा करते हैं?
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
राज्य के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने गहरा दुख व्यक्त किया है। CMO के बयान के अनुसार, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर राहत कार्यों की जानकारी ली और कारणों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजने का आदेश दिया है ताकि पीड़ित परिवारों को सहायता मिल सके। दुख के बयान जरूरी होते हैं। पर उससे भी ज्यादा जरूरी है कि अगली फैक्ट्री में यह खबर दोबारा न लिखी जाए।

राहत और बचाव कार्य
दमकल विभाग और आपदा राहत टीमें मौके पर डटी हैं। मलबा हटाने और संभावित फंसे लोगों को निकालने का काम जारी है। करीब 20 मजदूर घटना के समय काम कर रहे थे। जो बच गए, वे भी इस हादसे की आग अपने भीतर लेकर जिएंगे।
सस्ती आतिशबाज़ी, महंगी ज़िंदगियां
पटाखे त्योहारों में रोशनी फैलाते हैं, लेकिन उनकी फैक्ट्रियों में अक्सर अंधेरा ज्यादा होता है। गरीब मजदूर, अस्थायी रोजगार, न्यूनतम सुरक्षा, और अधिकतम जोखिम। हर साल किसी न किसी राज्य से ऐसी खबर आती है।
जब तक “सुरक्षा” निवेश नहीं, बोझ मानी जाएगी, तब तक फैक्ट्री की चिंगारी कभी भी श्मशान की आग बन सकती है।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि आग कैसे लगी। सवाल यह है कि सिस्टम कब जागेगा?
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